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लावा

 

(काव्� संग्र�)

 

 

जावे�अख़तर

 

 

 

 

ज़बाà¤?/font> 

को�ख़या�/span>

औ�को�भ�जज़्ब�/span>

को�भ�शय ह�/span>

जान�उसक�/span>

पहल�पहल आवा�मिल�थ�/span>

या उसकी तस्वी�बन�थ�/span>

सो�रहा हू�/span>

 

को�भ�आवा�/span>

लकीरो�मे�ज�ढल�/span>

त�कैस�ढल�थ�/span>

सो�रहा हू�/span>

य�ज�इ�आवा�अलि�है

सीधी लकीर मे�/span>

य�आिख़र किसन�भर द�थ�/span>

क्यो�सबन�य�मान लिया था

सामन�मेरी मे�प�इ�ज�फल रक्ख�है

 

इसक�से�ह�क्यो�कहत�है�/span>

से�त�इ�आवा�है

इ�आवा�क�इ�फल स�

ज�अनोख�रिश्ता बना है

कैस�बना था

औ�य�टेढ़ी-मेढ़ी लकीरे�/span>

जिनक�हर्फ़ कह�जाता है

य�आवाज़ो�की तस्वीरे�/span>

कैस�बन�थी�/span>

आवाज़े�तस्वी�बनी�/span>

या तस्वीरे�आवा�बन�थी�/span>r

सो�रहा हू�/span>

 

सार�चीज़े�

सार�जज़्ब�/span>

सार�ख़या�/span>

औ�उनक�तआरू�/span>

उनकी ख़ब�औ�/span>

उनक�हर पै॰गा�क�देन�पर फ़ाइ�/span>

सार�आवाज़े�/span>

इ�आवाज़ो�क�अपन�घर मे�ठहरात�

अपनी अमा�मे�रखती

टेढ़ी-मेढ़ी लकीरे�/span>

कि�न�य�कुनब�जोड़�है

सो�रहा हूँ�/span>

***

ग़ज़�/span>

जिधर जात�है�सब, जाना उध�अच्छ�नही�लगत�

मुझ�पामाल रस्तो�क�सफ़र अच्छ�नही�लगत�/span>

 

ग़लत बातो�क�ख़ामोशी स�सुनना, हाम�भर लेन�/span>

बहुत है�फ़ायद�इसमे�मग�अच्छ�नही�लगत�/span>

 

मुझ�दुश्मन स�भ�ख़ुद्दारी की उम्मीद रहत�है

किसी क�भ�ह�सर, क़दमो�मे�सर अच्छ�नही�लगत�/span>

 

बुलंदी पर इन्हे�मिट्ट�की ख़ुश्ब�त�नही�आती

य�व�शाखे�है�जिनक�अ�शजर अच्छ�नही�लगत�/span>

 

य�क्यो�बाक़�रह�आति�ज़न�/span>, य�भ�जला डाल�/span>

क�सब बेघ�हो�औ�मेर�ह�घर, अच्छ�नही�लगत�/span>

 

***

 

ग़ज़�/span>

कभी-कभी मै�य�सोचत�हू�क�मुझक�तेरी तलाश क्यो�है

क�जब है�सार�ह�तार टूट�त�सा�मे�इरतेआ�क्यो�है

 

को�अग�पूछत�य�हमस�/span>, बतात�हम ग�त�क्य�बतात�/span>

भला ह�सब क�क�य�न पूछ�क�दिल प�ऐस�ख़रा�क्यो�है

 

उठाक�हाथो�स�तुमन�छोड़�/span>, चल�न दानिस्ता तुमन�तोड़�/span>

अ�उल्ट�हमस�त�य�न पूछ�क�शीश�य�पाश-पाश क्यो�है

 

अज�दोराह�प�ज़िंदगी है कभी हवस दिल क�खींचती है

कभी य�शर्मिंदगी है दिल मे�क�इतनी फ़िक्र�मआ�क्यो�है

 

न फ़िक्�को�न जुस्तुज�है, न ख्वा�को�न आरज़�है

य�शख्�त�क�क�मर चुक�है, त�बेकफ़�फिर य�लाश क्यो�है

 

***

 

य�खे�क्य�है

मिर�मुख़ालि�न�चाल चल द�है

औ�अ�

मेरी चाल क�इंतेज़ा�मे�है

मग�मै�क�स�/span>

सæफे� ख़ानो�/span>

सियाह ख़ानो�मे�रक्ख�/span>

काल�सफ़े�मोहरो�क�देखत�हू�/span>

मै�सोचत�हू�/span>

य�मोहर�क्य�है�/span>

 

 à¤…गà¤? मैà¤?समझूà¤?/span>

क�य�ज�मोहर�है�/span>

सिर्फ़ लकड़ी क�है�खिलौन�

त�जीतन�क्य�है हारना क्य�

न य�ज़रूरी

न व�अह�है

अग�ख़ुशी है न जीतन�की

न हारन�क�ह�को�ग़म है

त�खे�क्य�है

मै�सोचत�हू�/span>

ज�खेलन�है

त�अपन�दिल मे�यक़ी�क�लू�/span>

य�मोहर�सचमुच क�बादशाह�-व॰जी�/span>

सचमुच क�है�प्याद�/span>

औ�इनक�आग�है

दुश्मनो�की व�फ़ौज

रखती है ज�क�मुझक�तबाह करन�क�

सार�मनसूब�/span>

सब इराद�

मग�मै�ऐसा ज�मान भ�लू�/span>

त�सोचत�हू�/span>

य�खे�क�है

य�जं�है जिसक�जीतन�है

य�जं�है जिसमे�सब है जाय�/span>

को�य�कहत�है जैस�मुझस�/span>

य�जं�भ�है

य�खे�भ�है

य�जं�है पर खिलाड़ियो�की

य�खे�है जं�की तरह क�/span>

मै�सोचत�हू�/span>

ज�खे�है

इसमे�इ�तरह क�उसू�क्यो�है

क�को�मोहर�रह�क�जाए

मग�ज�है बादशाह

उसप�कभी को�आँ�भ�न आ�/span>

व॰जी�ह�क�है बस इजाज़�/span>

क�जिस तरफ़ भ�व�चाह�जाए

 

मै�सोचत�हू�/span>

ज�खे�है

इसमे�इ�तरह क�उसू�क्यो�है

प्यादा ज�अपन�घर स�निकल�/span>

पलट क�वापस न जान�पाए

मै�सोचत�हू�/span>

अग�यह�है उसू�/span>

त�फिर उसू�क्य�है

अग�यह�है य�खे�

त�फिर य�खे�क्य�है

मै�इ�सवालो�स�जान�क�स�उल�रहा हू�/span>

मिर�मुख़ालि�न�चाल चल द�है

औ�अ�मेरी चाल क�इंतेज़ा�मे�है।

 

***

 

ग़ज़�/span>

क�जहाँ दीवा�थ�/span>, है आ�इ�दर देखि�/span>

क्य�समाई थ�भला दीवान�क�सर, देखि�/span>

 

पुर-सुकू�लगती है कितनी झी�क�पान�प�बत

पैरो�की बेताबिया�पान�क�अंद�देखि�/span>

 

छोड़क�जिसक�गय�थ�आ�को�औ�था

अ�मै�को�औ�हू�वापस त�आक�देखि�/span>

 

छोट�स�घर मे�थ�देख�ख्वा�महलो�क�कभी

औ�अ�महलो�मे�है�त�ख्वा�मे�घर देखि�

 

ज़हन�इंसानी इध�/span>, आफ़ा�की वुसअ�उध�/span>

ए�मंज़�है यहाँ अंद�क�बाहर देखि�/span>

 

अक्�य�कहती है दुनिया मिलत�है बाज़ा�मे�/span>

दिल मग�य�कहत�है कु�औ�बेहत�देखि�/span>

 ***

 

ग़ज़�/span>

हमन�ढूँढ�भ�त�ढूँढ�है�सहार�कैस�/span>

इ�सराबो�प�को�उम्�गुज़ार�कैस�/span>

 

हाथ क�हाथ नही�सूझ�/span>, व�तारीकी थ�/span>

�गय�हाथ मे�क्य�जान�सितार�कैस�/span>

 

हर तरफ़ शो�उसी नाम क�है दुनिया मे�/span>

को�उसक�ज�पुकार�त�पुकार�कैस�/span>

 

दिल बुझा जितन�थ�अरमा�सभ�ख़ा�हुए

रा�मे�फिर य�चमकत�है�शरार�कैस�/span>

 

न त�दम लेती है त�औ�न हवा थमत�है

ज़िंन्दगी ज़ुल्�तिर�को�सँवार�कैस�/span>

 ***

 

आँस�/span>

किसी क�ग़म सुन क�/span>

मेरी पलको�प�/span>

ए�आँस�ज��गय�है

य�आँस�क्य�है

 

य�आँस�क्य�इ�गवा�है

मेरी दर्द-मंदी क�मेरी इंसा�दोस्ती क�/span>

य�आँस�क्य�इ�सुबू�है

मेरी ज़िंदगी मे�ख़ुलू�की ए�रौशन�क�

य�आँस�क्य�य�बता रहा है

क�मेर�सीन�मे�ए�हस्सास दिल है

जिसन�किसी की दिलदो�दास्ताँ ज�सुन�/span>

त�सुनक�तड़प उठ�है

पराय�शोलो�मे�जल रहा है

पिघल रहा है

मग�मै�फिर ख़ु�स�पूछत�हू�/span>

य�दास्ताँ त�अभी सुन�है

य�आँस�भ�क्य�अभी ढला है

य�आँस�

क्य�मै�य�समझू�/span>

पहल�कही�नही�था

मुझ�त�श�है क�य�कही�था

य�मेर�दिल औ�मेरी पलको�क�दरमियाँ

इ�ज�फ़ासला है

जहाँ ख़यालो�क�शहर ज़िंन्द�है�/span>

औ�ख्वाबो�की तुर्बते�है�

जहाँ मुहब्बत क�उजड़�बा॰गों�मे�/span>

तलि्ख़यो�क�बबू�है�/span>

औ�कु�नही�है

जहाँ स�आग�है�/span>

उलझनो�क�घनेर�जंग�/span>

 

य�आँस�

शायद बहुत दिनो�स�/span>

वही�छिप�था

जिन्होंन�इसक�जनम दिया था

व�रं�त�मसलेह�क�हाथो�/span>

न जान�क�क़त्ल ह�गय�थ�/span>

त�करत�फिर किसप�ना�आँस�/span>

क�ह�गय�बेजवा�आँस�/span>

यती�आँस�/span>, यसी�आँस�/span>

न मोतब�था

न रास्तो�स�ह�बाख़ब�था

त�चलत�चलत�/span>

व�थम गय�था

ठिठ�गय�था

झिझ�गय�था

 

इध�स�आ�इ�किसी क�ग़म की

कहानी क�कारवा�ज�गुज़र�

यती�आँस�न�जैस�जाना

क�इ�कहानी की सरपरस्त�मिल�

त�मुम्कि�है

राह पाना

त�इ�कहानी की उंगली थाम�/span>

उसी क�ग़म क�रूमा�करत�/span>

 à¤‰à¤¸à¥€ कà¥?बारà¥?मेà¤?/span>

झूठ�सच्च�सवाल करत�

य�मेरी पलको�त��गय�है।

 ***

 

ग़ज़�/span>

यक़ी�क�अग�को�भ�सिलसिला नही�रहा

त�शुक्�कीजिए, क�अ�को�गिल�नही�रहा

 

न हिज्र है न वस्ल है अ�इसक�को�क्य�कह�/span>

क�फू�शा�पर त�है मग�खिल�नही�रहा

 

ख़ज़ान�तुमन�पाए त�ग़री�जैस�ह�ग�/span>

पल�प�अ�को�भ�मोती झिलमिला नही�रहा

 

बदल ग�है ज़िंदगी, बदल गय�है�लो�भ�/span>

ख़ुलू�क�ज�था कभी व�अ�सिला नही�रहा

 

ज�दुश्मन�ब॰खील स�हुई त�इतनी ख़ै�है

क�ज़ह�उ�क�पास है मग�पिला नही�रहा

 

लह�मे�जज़्�ह�सक�न इल्�त�य�हाल है

को�सवाल ज़ह�क�ज�द�जिला, नही�रहा

  ***

 

ग़ज़�/span>

बज़ाहि�क्य�है ज�हासिल नही�है

मग�य�त�मिर�मंज़�नही�है

क़

य�तोद�रे�क�है, बी�दरिया

य�बह जाएग�य�साहिल नही�है

 

बहुत आसा�है पहचान इसकी

अग�दुखत�नही�त�दिल नही�/span>r है

 

मुसाफ़र व�अज�है कारवा�मे�/span>

क�ज�हमराह है शामिल नही�है

 

बस इ�मक़तू�ह�म॰क्तू�क�है

बस इ�क़ातिल ह�त�क़ातिल नही�/span> है

 

कभी त�रात क�तुम रात क�द�/span>

य�का�इतन�भ�अ�मुश्कि�नही�/span>r है

 ***

 

कायना�/span>

मै�कितनी सदियो�स�त�रहा हू�/span>

य�कायना�औ�इसकी वुस्अ�/span>

तमाम हैरत तमाम हैरत

य�क्य�तमाशा य�क्य�समाँ है

 à¤¯à¥? क्यà¤?अयाà¤?है यà¥?क्यà¤?निहाँ है

अथा�साग�है इ�ख़ल�क�/span>

न जान�क�स�न जान�क�त�/span>

कहा�तल�है

हमार�नज़रो�की इंतेह�है

जिस�समझत�है�हम फ़ल�है

 

य�रात क�छलनी-छलनी-सा काल�आस्मा�है

क�जिसमे�जुगन�की शक्�मे�/span>

बेशुमा�सूर�पिघल रह�है�/span>

शहाब�साक़ब है�/span>

या हमेश�की ठंडी-काली फ़िज़ाओ�मे�

जैस�आ�क�ती�चल रह�है�/span>

करोड़ह�नूरी बरसो�क�फ़ासलो�मे�फैल�/span>

य�कहकशाए�/span>

ख़ल�क�घेर�है�/span>

या ख़लाओ�की ॰कै�मे�है�

य�कौ�किसक�लिए चला है

हर ए�लम्हा

करोड़ो�मीलो�की ज�मुसाफ़त है

इनक�आिख़र कहा�है जाना

अग�है इनक�कही�को�आिख़र�ठिकान�/span>

त�व�कहा�है

 

जहाँ कही�है

सवाल य�है

वहाँ स�आग�को�ज़मी�है

को�फ़ल�है

 à¤…गà¤? नहीà¤?है

त�य� �/span>नही�/span>’ कितनी दू�त�है

 

मै�कितनी सदियो�स�त�रहा हू�/span>

य�कायना�औ�इसकी वुस्अ�/span>

तमाम हैरत तमाम हैरत

सितार�जिनकी स॰फी�किरने�/span>

करोड़ो�बरसो�स�राह मे�है�/span>

ज़मी�स�मिलन�की चाह मे�है�/span>

कभी त�आक�करेंगी य�मेरी आँखे�रौशन

कभी त�आएग�मेर�हाथो�मे�रौशन�क�ए�ऐसा दामन

क�जिसक�थाम�मै�जाक�देखूंग�इ�ख़लाओ�क�/span>

फैल�आँग�/span>

कभी त�मुझक�य�कायना�अपन�रा�खुलक�/span>

सुना ह�देगी

य�अपन�आ॰गा�अपन�अंजा�

मुझक�इ�दिन बता ह�देगी

 

अग�को�वाइ�अपन�मिम्बर स�/span>

नख़व�आमे�लहज�मे�य�कह�/span>

क�तुम त�कभी समझ ह�नही�सकोग�/span>

क�इ�क़दर है य�बात गहरी

त�को�पूछ�/span>

ज�मै�न समæझा

त�कौ�समझेग�/span>

औ�जिसक�कभी न को�समझ सक�/span>

ऐस�बात त�फिर ॰फु॰जू�ठहरी�/span>

 ***

 

ग़ज़�/span>

जीन�मुश्कि�है क�आसा�ज़र�दे�त�ल�

लो�लगत�है�परेशा�ज़र�दे�त�ल�/span>

 

फिर मुक़र्रिर को�सरगर्�सर�मिम्बर है

किसक�है क़त्ल क�सामान ज़र�दे�त�ल�/span>

 

य�नया शहर त�है ॰खू�बसाया तुमन�/span>

क्यो�पुराना हु�वीरा�ज़र�दे�त�ल�/span>

 

इ�चिरा॰गो�क�तल�ऐस�अंधेर�क्यो�है�/span>

तुम भ�रह जाओग�हैरान ज़र�दे�त�ल�/span>

 

तुम य�कहत�ह�क�मै�॰गै�हू�फिर भ�शायद

निक�आ�को�पहचान ज़र�दे�त�ल�/span>

 

य�सताइ�की तमन्ना य�सिल�की परवाह

कहा�लाए है�य�अरमा�ज़र�दे�त�ल�/span>

 

***

 

ग़ज़�/span>

त�किसी प�जाँ क�निसार क�द�क�दिल क�क़दमो�मे�डाल द�/span>

को�होग�तेर�यहाँ कभी य�ख़या�दिल स�निका�द�/span>

 

मिर�हुक्मरा�भ�अजीब है�क�जवाब लेक�व�आ�है�/span>

मुझ�हुक्�है क�जवाब क�हमे�सीध�सीध�सवाल द�/span>

 

रग�पै मे�जम गय�सर्द ॰खू�न मै�चल सकू�न मै�हिल सकू�/span>

मिर�ग़म की धू�क�ते�क�/span>, मिर�॰खू�क�त�उबा�द�/span>

 

व�ज�मुस्कुर�क�मिला कभी त�य�फ़िक्�जैस�मुझ�हुई

कहू�अपन�दिल क�ज�मुद्द�/span>, कही�मुस्कुर�क�न टाल द�/span>

 

य�ज�ज़ह�दिन की है रौशन�त�य�दिल है रात मे�चाँदन�/span>

मुझ�ख्वा�उतन�ह�चाहिए�य�ज़मान�जितन�ख़या�द�/span>

 

***

 

 

एतेरा�/span>

सच त�य�है ॰कुसू�अपन�है

चाँद क�छून�की तमन्ना की

आस्मा�क�ज़मीन पर माँग�

फू�चाहा क�पत्थरो�प�खिल�/span>

काँटो�मे�की तलाश ख़ुशब�की

आ�स�माँगत�रह�ठंड�/span>

ख्वा�ज�देख�/span>

चाहा सच ह�जाए

इसकी हमक�सज़�त�मिलन�थ�।

 

***

 

ग़ज़�/span>

मिसाल इसकी कहा�है को�ज़मान�मे�/span>

क�सार�खोन�क�ग़म पाए हमन�पान�मे�/span>

 

व�शक्�पिघल�त�हर शय मे�ढल ग�जैस�/span>

अजीब बात हुई है उस�भुलान�मे�/span>

 

ज�मुंतिज़�न मिला व�त�हम है�शर्मिंद�/span>

क�हमन�दे�लग�द�पलटक�आन�मे�/span>

 

लती�था व�तख़य्यु�स�/span>, ख्वा�स�नाज़ु�/span>

गँव�दिया उस�हमन�ह�आज़मान�मे�/span>

 

समझ लिया था कभी इ�सराब क�दरिया

पर इ�सुकू�था हमक�फ़रे�खान�मे�/span>

 

झुक�दर॰ख्�हवा स�/span>, त�आँधियो�न�कह�/span>

॰ज्यादा फ़॰र्�नही�झुकन�टू�जान�मे�/span>

 

***

 

ग़ज़�/span>

यह�हालात इब्तेद�स�रह�/span>

लो�हमस�ख़फ़�ख़फ़�स�रह�/span>

 

इ�चिरा॰गो�मे�ते�ह�क�था

क्यो�गिल�हमक�फिर हवा स�रह�/span>

 

बहस, शतरं�/span>, शे�/span>, मौसीक़ी

तुम नही�थ�त�य�दिलास�रह�/span>

 

ज़िंदगी की शराब माँगत�ह�/span>

हमक�देख�/span>, क�पीक�प्यास�रह�/span>

 

उसक�बंदो�क�देखक�कहि�/span>

हमक�उम्मीद क्य�ख़ुद�स�रह�/span>

 ***

 

ख़ुद�हाफ़�/span>

मुझ�व�धुं�मे�लिपट�हुई

मासू�सदियाँ याद आती है�/span>

क�जब तुम हर जग�थ�/span>

हर तरफ़ थ�/span>

हर कही�थ�तुम

रिहाइ�थ�तुम्हार�आस्मानो�मे�/span>

ज़मी�क�भ�मकी�थ�तुम

तुम्ही�थ�चाँद औ�सूर�क�मुल्को�मे�/span>

तुम्ही�तारो�की नगरी मे�/span>

हवाओ�मे�/span>

फ़िज़ाओ�nbsp; मे�/span>

दिशाओ�मे�/span>

सुलगती धू�मे�तुम थ�/span>

तुम्ही�थ�ठंडी छाँवो�मे�/span>

तुम्ही�खेतो�मे�उगत�थ�/span>

तुम्ही�पेड़ो�प�फलत�थ�/span>

तुम्ही�बारिश की बूँदो�मे�/span>

तुम्ही�सार�घटाओ�मे�/span>

हर इ�साग�स�आग�तुम थ�/span>

हर पर्बत क�ऊपर तुम

वबाओ�nbsp; मे�

हर इ�सैलाब मे�/span>

सब ज़लज़लो�मे�/span>

हादसो�मे�भ�/span>

रहा करत�थ�छि�क�तुम

हर इ�आँधी मे�/span>

तू॰फा�मे�/span>

समुंद�मे�/span>

बयाबाँ मे�/span>

हर इ�मौसम हर इ�रू�मे�/span>

तुम्ही�हर इ�सितम मे�थ�/span>

तुम्ही�हर इ�कर�मे�थ�/span>

सभ�पाकीज़�नदियो�मे�/span>

मुक़द्दस आ�मे�तुम थ�/span>

दरिंदो�औ�चरिंदा�/span>

बिच्छुओ�मे�ना�मे�तुम थ�/span>

सभ�क�डं�मे�तुम थ�/span>

सभ�क�ज़ह�मे�तुम थ�/span>

ज�इंसानो�प�आत�है�/span>

हर ऐस�क़हर मे�तुम थ�/span>

मग�सदियो�क�तन स�लिपट�/span>

धुं�अ�छ�रह�है

अ�कही�कु�रौशन�स�ह�रह�है

औ�कही�कु�तीरगी स�घट रह�है

य�उजाल�साफ़ कहत�है�/span>

न अ�तुम ह�वबाओ�मे�/span>

न अ�तुम ह�घटाओ�मे�/span>

न बिच्छ�मे�न त�अ�ना�मे�तुम ह�/span>

न आँधी औ�तू॰फा�/span>

औ�न त�पाकीज़�नदियो�

औ�मुक़द्दस आ�मे�तुम ह�/span>

 

अद�है शर्त

बस इतन�कहूँग�/span>

तुमन�शायद मुझ प�है य�मेहरबानी की

मै�अपन�इल्�की मश्अ�लिए

पहुँचा जहाँ हू�/span>

मैंन�देख�/span>

तुमन�है न॰क्ल�मकानी की

मग�अ�भ�ख़ल�की वुस्अतो�मे�

तुम ह�रहत�ह�/span>

जिस�कहत�है�िक़स्मत

अस्�मे�/span>

हालात क�बिफरा समुंद�है

मग�अ�त�यक़ीन�आ�है

बनक�समुंद�/span>

तुम ह�बहत�ह�/span>

 

मुझ�य�मानना होग�/span>

वहाँ तुम ह�/span>

जहाँ य�रा�है पिन्हाँ

क�ऐस�कायनात�बेकरा�की इब्तेद�/span>

औ�इंतेह�क्य�है

वहाँ तुम ह�/span>

जहाँ य�आगही है

मौत क�इ�पर्द�क�पीछ�छिप�क्य�है

अभी कु�दिन वहाँ रह ल�/span>

मग�इतन�बता दू�मै�/span>

उध�मै�आनेवाल�हूँ�/span>

 

***

 

ग़ज़�/span>

जब आइन�को�देख�इ�अजनबी देख�/span>

कहा�प�लाई है तुमक�य�ज़िंदगी देख�/span>

 

मुहब्बतो�मे�कहा�अपन�वास्त�॰फुर्सत

जिस�भ�चाह�व�चाह�मिर�ख़ुशी देख�/span>

 

ज�ह�सक�त�॰ज्यादा ह�चाहना मुझक�/span>

कभी ज�मेरी मुहब्बत मे�कु�कमी देख�/span>

 

ज�दू�जाए त�ग़म है ज�पास आ�त�दर्द

न जान�क्य�है व�कमब॰ख्�आदमी देख�/span>

 

उजाल�त�नही�क�सकत�इसक�हम लेकि�/span>

ज़र�स�क�त�हुई है य�तीरगी देख�/span>

 

***

 

ग़ज़�/span>

सार�हैरत है मिर�सार�अद�उसकी है

बेगुनाही है मिर�औ�सæजा उसकी है

 

मेर�अल्फ़ा�मे�ज�रं�है व�उसक�है

मेर�एहसास मे�ज�है व�फ़िज़�उसकी है

 

श�/span>'र मेर�है�मग�उनमे�मुहब्बत उसकी

फू�मेर�है�मग�बाद�सबा उसकी है

 

इ�मुहब्बत की य�तस्वी�है द�रंगो�मे�/span>

शौक़ सब मेर�है औ�सार�हया उसकी है

 

हमन�क्य�उसस�मुहब्बत की इजाज़�ल�थ�/span>

दिल-शिक�ह�सह�/span>, पर बात बजा उसकी है

 

ए�मेर�ह�सिवा सबक�पुकार�है को�/span>

मैंन�पहल�ह�कह�था य�सदा उसकी है

 

॰खू�स�सींची है मैंन�ज�ज़मी�मर-मर क�/span>

व�ज़मी�/span>, ए�सितमग�न�कह�/span>, उसकी है

 

क़

 

उसन�ह�इसक�उजाड़�है इस�लूट�है

य�ज़मी�उसकी अग�है भ�त�क्य�उसकी है

 

***

परस्तार

व�ज�कहलात�था दीवान�तिरा

व�जिस�हि॰फ्�था अ॰फ्सान�तिरा

जिसकी दीवारो�प�आवे॰जा�थी�/span>

तस्वीरे�तिर�/span>

व�ज�दोहरात�था

तक़रीरे�तिर�/span>

व�ज�ख़ु�था तिर�ख़ुशियो�स�/span>

 à¤¤à¤¿à¤°à¥? ग़म सà¥?उदाà¤?/span>

दू�रहक�ज�समझता था

व�है तेर�पास

व�जिस�सज्दा तुझ�करन�स�/span>

इन्का�न था

उसक�दरअस्�कभी तुझस�/span>

को�प्यार न था

उसकी मुश्कि�थ�/span>

क�दुश्वार थ�उसक�रस्त�/span>

जिनप�बे॰खौ॰फ�ख़त�/span>

घूमत�रहज़�थ�/span>

सदा उसकी अन�क�दरपै

उसन�घबराक�/span>

सब अपनी अन�की दौलत

तेरी तहवी�मे�रखव�द�थ�/span>

अपनी ज़िंल्ल�क�व�दुनिया की नज़�/span>

औ�अपनी भ�निगाहो�स�छिपान�क�लिए

कामयाबी क�तिर�/span>r

तेरी ॰फुतूहा�/span>

 à¤¤à¤¿à¤°à¥? इ॰ज्ज़à¤?कà¥?/span>

व�तिर�नाम तिर�/span>r शोहर�क�/span>

अपन�होन�क�सबब जानता था

है वजू�उसक�जुदा तुझस�/span>

य�क�मानता था

व�मग�/span>

पुरख़त�रास्तो�स�आ�निक�आय�है

वक़्त न�तेर�बराबर न सह�/span>

कु�न कु�अपन�कर�उसप�भ�फ़रमाया है

अ�उस�तेरी ज़रूर�ह�नही�/span>

जिसक�दावा था कभी

अ�व�अक़ीदत ह�नही�/span>

तेरी तहवी�मे�ज�रक्खी थ�क�/span>

उसन�अन�/span>

आ�व�माँ�रहा है वापस

 à¤¬à¤¾à¤¤ इतनी-सà¥?है

ऐ साहिब�नाम�शोहर�/span>

जिसक�क�/span>

तेर�ख़ुद�होन�स�इन्का�न था

व�कभी तेर�परस्तार न था।

 

***

 

ग़ज़�/span>

निग�ग�सब की सब समुंद�/span>, ज़मी�बच�अ�कही�नही�है बचात�हम अपनी जान जिसमे�व�कश्ती भ�अ� कही�नही�है

 

बहुत दिनो�बाद पाई ॰फुर्सत त�मैंन�ख़ु�क�पलटक�देख�/span>

मग�मै�पहचानता था जिसक�व�आदमी अ�कही�नही�है

 

गुज़�गय�वक़्त दिल प�लिखक�न जान�कैसी अजीब बाते�/span>

वरक़ पलटता हू�मै�ज�दिल क�त�सादगी अ�कही�नही�है

 

व�आ�बरस�है दोपह�मे�क�सार�मंज़�झुलस ग�है�/span>

यहाँ सवेर�ज�ताज़गी थ�व�ताज़गी अ�कही�नही�है

 

तुम अपन�क़स्बो�मे�जाक�देख�वहाँ भ�अ�शहर ह�बस�है�/span>

क�ढूँढत�ह�ज�ज़िंदगी तुम व�ज़िंदगी अ�कही�नही�है

 

***

 

ग़ज़�/span>

दर्द अपनात�है पराए कौ�/span>

कौ�सुनता है औ�सुनाए कौ�/span>

 

कौ�दोहरा�फिर वह�बाते�/span>

ग़म अभी सोय�है, जगा�कौ�/span>

 

अ�सुकू�है त�भूलन�मे�है

लेकि�उ�शख्�क�भुलाए कौ�/span>

 

व�ज�अपन�है�क्य�व�अपन�है�/span>

कौ�दु�झेल�/span>, आज़मा�कौ�/span>

 

आ�फिर दिल है कु�उदा�उदा�/span>

देखि�आ�याद आ�कौ�/span>

 

***

 

अजीब क़िस्सा है

अजीब क़िस्सा है

जब य�दुनिया समझ रह�थ�/span>

तुम अपनी दुनिया मे�ज�रह�ह�/span>

मै�अपनी दुनिया मे�ज�रहा हू�/span>

त�हमन�सार�निगाहो�स�दू�/span>

ए�दुनिया बसाई थ�/span>

ज�क�मेरी भ�थ�/span>

तुम्हार�भ�थ�/span>

जहाँ फ़िज़ाओ�मे�/span>

दोनो�क�ख्वा�जागत�थ�/span>

जहाँ हवाओ�मे�/span>

 à¤¦à¥‹à¤¨à¥‹à¤? की सरगोशियाà¤?घुलà¥?थीà¤?/span>

जहाँ क�फूलो�मे�/span>

दोनो�की आरज़�क�सब रं�/span>

खि�रह�थ�/span>

जहाँ प�दोनो�की जुरअतो�क�/span>

हज़ा�चश्म�उब�रह�थ�/span>

न वसवस�थ�न रंज�ग़म थ�/span>

सुकू�क�गहर�इ�समुंद�था

औ�हम थ�/span>

 

अजीब क़िस्सा है

सार�दुनिया न�/span>

जब य�जाना

क�हमन�सार�निगाहो�स�दू�

ए�दुनिया बसाई है त�/span>

हर ए�अबर�न�जैस�हम पर कमा�तान�/span>

तमाम पेशानियो�प�उभरी�/span>

ग़म औ�॰गुस्स�की गहरी शिकने�/span>

किसी क�लहज�स�तल्॰खी छलकी

किसी की बातो�मे�तुर्शा आ�/span>

किसी न�चाहा

क�को�दीवा�ह�उठ�द�/span>

किसी न�चाहा

हमार�दुनिया ह�व�मिटा द�/span>

मग�ज़मान�क�हारना था

ज़मान�हारा

य�सार�दुनिया क�मानना ह�पड़ा

हमार�ख़या�की ए�स�ज़मी�है

हमार�ख्वाबो�क�ए�जैसा ह�आस्मा�है

मग�पुरान�य�दास्ताँ है

क�हमप�दुनिया

अ�ए�अर्स�स�मेहरबा�है

 

अजीब क़िस्सा है

जब क�दुनिया न�/span>

क�क�तस्ली�क�लिया है

हम ए�दुनिया क�रहन�वाल�है�/span>

सच त�य�है

तुम अपनी दुनिया मे�ज�रह�ह�/span>

मै�अपनी दुनिया मे�ज�रहा हूँ�/span>

 

 ***

 

ग़ज़�/span>

शुक्�है ख़ैरिय�स�हू�साहब

आपस�औ�क्य�कहू�साहब

 

अ�समझन�लग�हू�सूद�ज़िंया�/span>

अ�कहा�मुझमे�व�जुनू�साहब

 

ज़िंल्लत�॰जीस्�या शिकस्त�ज़मीर

य�सहू�मै�क�व�सहू�साहब

 

हम तुम्हे�याद करत�/span>, र�लेत�/span>

द�घड़�मिलता ज�सुकू�साहब

 

शाम भ�ढल रह�है घर भ�है दू�

कितनी दे�औ�मै�रूकू�साहब

 

अ�झुकूँग�त�टू�जाऊँग�/span>

कैस�अ�औ�मै�झुकू�साहब

 

कु�रिवायात की गवाही पर

कितन�जुर्माना मै�भरू�साहब

 

 ***

 

ग़ज़�/span>

खुल�है दर प तिरा इंतेज़ा�जाता रहा

ख़ुलू�त�है मग�एतेबा�जाता रहा

 

किसी की आँ�मे�मस्त�त�आ�भ�है वह�/span>

मग�कभी ज�हमे�था ख़ुमा�/span>, जाता रहा

 

कभी ज�सीन�मे�ए�आ�थ�व�सर्द हुई

कभी निगा�मे�ज�था शरार जाता रहा

 

अज�सा चैन था हमक�क�जब थ�हम बेचै�/span>

क़रार आय�त�जैस�क़रार जाता रहा

 

कभी त�मेरी भ�सुनवाई होगी महिफ़ल मे�/span>

मै�य�उम्मीद लिए बार-बार जाता रहा

 

 ***

 

ग़ज़�/span>

1

दश्त�जुनू�वीरानिया�/span>, क़ह्त�सुकू�हैरानियाँ, इ�दिल औ�उसकी

ब�सर�सामानियाँ, अ�ख़ाकदा�ता आस्मा�/span>, तन्हाइया�तन्हाइया�तन्हाइया�/span>

 

चेहर�ज़मी�क�ज़र्�है, लहजा हवा क�सर्द है, पहन�फ़िज़ाए�है�कफ़�

या गर्�है, मातम-कुना�है य�समाँ, तन्हाइया�तन्हाइया�तन्हाइया�/span>

 2

सब हमसफ़र अ�ख�चुक�/span>, हम हाथ सबस�ध�चुक�/span>, हम सबक�क�क�र�चुक�/span>,

उम्मीद हसरत आरज़�जितन�फ़रो॰जा�थ�यहाँ गु�सब चिराग़ अ�ह�चुक�/span>

 

अ�ए�लम्ब�रात है, अ�ए�ह�त�बात है, अ�दिल प�जैस�ग़म क�

भार�हाथ है, अ�इ�यह�है दास्ताँ, तन्हाइया�तन्हाइया�तन्हाइया�/span>

3

अ�य�सफ़र दुश्वार है, हर हर क़दम दीवा�है, हर लम्हा इ�आज़ा�है

अ�रो॰ज�शब, शाम�सहर है वक़्त व�बीमा�ज�मरन�स�भ�लाचार है

 

मजबू�होक�ज़िंदगी, है साँस रोक�ज़िंदगी, है गुं�अ�आवा�

खोक�ज़िंदगी, है�इ�ख़मोशी मे�निहाँ तन्हाइया�तन्हाइया�तन्हाइया�/span>

4

सहम�हुई है�ख्वाहिशे�/span>, ठिठकी हुई है काविशे�/span>, क्य�दोस्ती क्य�रंजिशे�/span>,

सब जैस�अ�है�बेअस�बेवाक़�स�ज़िंदगी की है�अज�य�साज़शे�/span>

 

ज�ग़म थ�व�भ�ख�ग�/span>, दिल जैस�ख़ाली ह�ग�/span>, क�ज�थ�अपन�हमसफ़र

व�त�ग�/span>, अ�हर तरफ़ है�हुक्मरा�तन्हाइया�तन्हाइया�तन्हाइया�/span>

  5

ऐ ॰जीस्�य�त�ह�बता, य�क्य�हु�कैस�हु�/span>, क्यो�हमन�पाई य�सज़�

अ�याद करत�है�अग�त�याद त�आत�नही�देख�था हमन�ख्वा�क्य�/span>

 

क्य�सा�क्य�जाम�सुब�/span>, रूख़सत हुई हर आरज़�/span>, चारो�पहर लगत�है

जैस�चारस�/span>, है�साकित�जामिद यहाँ तन्हाइया�तन्हाइया�तन्हाइया�/span>

 

***

दिल

दिल व�सह्रा था

क�जिस सह्रा मे�/span>

हसरते�/span>

रे�क�टीलो�की तरह रहत�थी�/span>

जब हवादिस की हवा

उनक�मिटान�क�लिए

चलत�थ�/span>

यहाँ मिटत�थी�/span>

कही�औ�उभ�आती थी�/span>

शक्�खोत�ह�/span>

नई शक्�मे�ढल जात�थी�/span>

दिल क�सह्रा प�मग�अ�की बार

सानेह�गुज़र�कु�ऐसा

क�सुनाए न बन�/span>

आँधी व�आ�क�सार�टील�/span>

ऐस�बिखर�/span>

क�कही�औ�उभ�ह�न सक�/span>

यू�मिट�है�/span>

क�कही�औ�बनाए न बन�/span>

अ�कही�/span>

टील�नही�/span>

 à¤°à¥‡à¤? नहीà¤?/span>

रे�क�ज़र्र�नही�/span>

दिल मे�अ�कु�भ�नही�/span>

दिल क�सह्रा भ�अग�कहि�/span>

त�कैस�कहिए�/span>

 

***

आरज़�क�मुसाफ़र

जान�किसकी तलाश उनकी आँखो�मे�थ�/span>

आरज़�क�मुसाफ़र

भटकत�रह�/span>

जितना भ�व�चल�/span>

उतन�ह�बि�ग�/span>

राह मे�फ़ासल�/span>

ख्वा�मंज़�थ�/span>

औ�मंज़ले�ख्वा�थी�/span>

रास्तो�स�निकलत�रह�रास्त�/span>

जान�कि�वास्त�/span>

आरज़�क�मुसाफ़र भटकत�रह�/span>

 

जिनप�सब चलत�है�/span>

ऐस�सब रास्त�छोड़क�/span>

ए�अंजा�पगडंडी की उंगली थाम�हुए

इ�सितार�स�/span>

उम्मीद बाँध�हुए सम्त की

हर गुमा�क�य॰की�मानक�/span>

अपन�दिल स�/span>

को�धोख�खात�हुए जानक�/span>

सह्रा-सह्रा

समुंद�क�व�ढ़ूंढत�

कु�सराबो�की जानिब

रह�गामज़�/span>

यू�नही�था

क�उनक�ख़ब�ह�न थ�/span>

य�समुंद�नही�/span>

लेकि�उनक�कही�/span>

शायद एहसास था

य�फ़रे�/span>

उनक�महव�सफ़र रक्खेग�/span>

य�सबब था

क�था औ�को�सबब

ज�लिए उनक�फिरता रहा

मंज़लो�-मां॰जिलो�/span>

रास्त�रास्त�/span>

जान�कि�वास्त�/span>

आरज़�क�मुसाफ़र भटकत�रह�/span>

 

अक्स�ऐसा हु�/span>

शहर-दर-शहर

औ�बस्त�बस्त�/span>

किसी भ�दरीच�मे�/span>

को�चिरा॰ग�मुहब्बत न था

बेरू॰खी स�भर�/span>

सार�गलियो�मे�/span>

सार�मकानो�क�/span>

दरवा॰ज�यू�बं�थ�

जैस�इ�सर्द

ख़ामो�लहज�मे�/span>

व�क�रह�हो�/span>

मुरव्वत क�औ�मेहरबानी क�मस्क�/span>

कही�औ�होग�/span>

यहाँ त�नही�है

यह�ए�मंज़�समेट�थ�

शहरो�क�पथरील�सब रास्त�/span>

जान�कि�वास्त�/span>

आरज़�क�मुसाफ़र भटकत�रह�/span>

 

औ�कभी यू�हु�/span>

आरज़�क�मुसाफ़र थ�/span>

जलत�सुलगती हुई धू�मे�/span>

कु�दर॰ख्तो�न�साय�बिछा�मग�/span>

उनक�ऐसा लग�/span>

साय�मे�ज�सुकू�

औ�आरा�है

मंज़लो�त�पहुँचन�न देग�उन्हे�/span>

औ�यू�भ�हु�/span>

महकी कलियो�न�ख़ुश्ब�क�पै॰गा�भेज�उन्हे�/span>

उनक�ऐसा लग�/span>

चं�कलियो�प�कैस�क़नाअ�करे�/span>

उनक�त�ढूँढन�है

व�गुलश�क�जिसक�

किसी न�अभी त�है देख�नही�/span>

जान�क्यो�था उन्हे�इसक�पूर�य॰की�/span>

दे�ह�या सवे�उनक�लेकि�कही�/span>

ऐस�गुलश�क�मिल जाएंग�रास्त�/span>

जान�कि�वास्त�/span>

आरज़�क�मुसाफ़र भटकत�रह�/span>

 

धू�ढलन�लगी

बस ज़र�दे�मे�रात ह�जाएगी

आरज़�क�मुसाफ़र ज�है�/span>

उनक�क़दमो�तल�/span>

ज�भ�इ�राह है

व�भ�शायद अँधेर�मे�ख�जाएगी

आरज़�क�मुसा॰फिर भ�

अपन�थक�हार�बेजा�पैरो�प�/span>

कु�दे�त�लड़खड़ाएंग�

औ�गिरक�स�जाएंग�/span>

सिर्फ़ सन्नाटा सोचेग�य�रातभर

मंज़ले�त�इन्हे�जान�कितनी मिली�/span>r

य�मग�/span>

मंज़लो�क�समझत�रह�जान�क्यो�रास्त�/span>

जान�कि�वास्त�/span>

आरज़�क�मुसाफ़र भटकत�रह�/span>

 

औ�फिर इ�सवेर�की उजली किर�/span>

तीरगी ची�क�/span>

जगमग�देगी

जब अनगिन�रहगुज़ारो�प�बिखर�हुए

उनक�न॰क्श�क़दम

आिफ़यतगाहो�मे�रहनेवाल�/span>

य�हैरत स�मजबू�होक�कहेंग�/span>

य�न॰क्श�क़दम सिर्फ़ न॰क्श�क़दम ह�नही�/span>

य�त�दरया॰फ्त है�

य�त�ईजाद है�/span>

य�त�अ॰फ्का�है�/span>

य�त�अश्॰आ�है�

य�को�र॰क्�है�

य�को�रा�है�/span>

इनस�ह�त�है�आरास्त�/span>

सार�तह॰जीब�तारीख़ क�/span>

वक़्त क�/span>

ज़िंदगी क�सभ�रास्त�/span>

 

व�मुसाफ़र मग�

जानत�बूझत�भ�रह�बेख़बर

जिसक�छ�ले�क़दम

व�त�बस राह थ�/span>

उनकी मंज़�दिग�थ�/span>

अल�चाह थ�/span>

ज�नही�मिल सक�उसकी थ�आरज़�/span>

ज�नही�है कही�उसकी थ�जुस्तुज�/span>

शायद इ�वास्त�/span>

आरज़�क�मुसाफ़र भटकत�रहे�/span>

 

***

 

ग़ज़�/span>

बरसो�की रस्म�राह थ�इ�रो�उसन�तो�द�/span>

हुशियार हम भ�क�नही�/span>, उम्मीद हमन�छो�द�/span>

 

गिरहे�पड़�है�कि�तरह, य�बात है कु�इ�तरह

व�डो�टूटी बारहा, हर बार हमन�जो�द�/span>

 

उसन�कह�कैस�ह�तुम, बस मैंन�लब खोल�ह�थ�/span>

औ�बात दुनिया की तरफ़ जल्द�स�उसन�मो�द�/span>

 

व�चाहता है सब कहे�/span>, सरका�त�बेऐ�है�/span>

ज�दे�पाए ऐब व�हर आँ�उसन�फो�द�/span>

 

थोड़ी-स�पाई थ�ख़ुशी त�स�ग�थ�ज़िंदगी

ऐ दर्द तेर�शुक्रिय�/span>, ज�इ�तरह झंझो�द�/span>

 

***

 

ग़ज़�/span>

प्यास की कैस�लाए ताब को�/span>

नही�दरिया त�ह�सराब को�/span>

 

ज़॰ख्�दिल मे�जहाँ महकत�है

इसी क्यारी मे�था गुला�को�/span>

 

रात बजत�थ�दू�शहनाई

रोय�पीक�बहुत शराब को�

 

दिल क�घेर�है�रोज़गा�क�ग़म

रद्द�मे�ख�ग�किता�को�/span>

 

कौ�सा ज़॰ख्�किसन�ब॰ख्श�है

इसक�रक्ख�कहा�हिसाब को�/span>

 

फिर मै�सुनन�लग�हू�इ�दिल की

आनेवाल�है फिर अज़ा�को�/span>

 

शब की दहली�पर शफ़क़ है लह�/span>

फिर हु�क़त्ल आ॰फ्ता�को�/span>

 

***

 

बरग�/span>

मेर�रस्त�मे�इ�मो�था

औ�उ�मो�पर

पे�था ए�बरग�क�/span>

ऊँचा

घना

जिसक�साए मे�मेर�बहुत वक़्त बीत�है

लेकि�हमेश�यह�मैंन�सोच�/span>

क�रस्त�मे�य�मो�ह�इसलि�है

क�य�पे�है

उम्�की आँधियो�मे�/span>

व�पे�ए�दिन गि�गय�/span>

मो�लेकि�है अ�त�वही�क�वही�/span>

 

देखत�हू�त�/span>

आग�भ�रस्त�मे�/span>

बस मो�ह�मो�है�/span>

पे�को�नही�/span>

 

रास्तो�मे�मुझ�यू�त�मिल जात�है�मेहरबा�/span>

फिर भ�हर मो�पर

पूछत�है य�दिल

व�ज�इ�छाँ�थ�/span>

ख�ग�है कहाँ�/span>

 

***

शबाना

य�आ�दिन क�हंगाम�/span>

य�जब देख�सफ़र करन�/span>

यहाँ जाना - वहाँ जाना

इस�मिलना उस�मिलना

हमार�सार�लम्ह�/span>

ऐस�लगत�है�/span>

क�जैस�ट्रे�क�चलन�स�पहल�/span>

रेलव�स्टेशनो�पर

जल्द�जल्द�अपन�डब्ब�ढूँढत�/span>

को�मुसाफ़र हो�/span>

जिन्हे�क�सां�भ�लेन�की मुह्लत है

कभी लगत�है

तुमक�मुझस�मुझक�तुमस�मिलन�क�/span>

ख़या�आ�/span>

 à¤•à¤¹à¤¾à¤? इतनी भà¥?॰फुर्सत है

 

मग�जब संगदि�दुनिया मेर�दिल तोड़ती है त�/span>

को�उम्मीद चलत�चलत�/span>

जब मुँह मोड़ती है त�/span>

कभी को�ख़ुशी क�फू�/span>

जब इ�दिल मे�खिलत�है

कभी जब मुझक�अपन�ज़ह�स�

को�ख़या�इन॰आ�मिलता है

कभी जब इ�तमन्ना पूरी होन�स�/span>

य�दिल ख़ाली-सा होत�है

कभी जब दर्द आक�पलको�प�मोती पिरोत�है

त�य�एहसास होत�है

ख़ुशी ह�ग़म ह�हैरत ह�/span>

को�जज़्ब�ह�/span>

इसमे�जब कही�इ�मो�आ�त�/span>

वहाँ पलभर क�/span>

सार�दुनिया पीछ�छू�जात�है

वहाँ पलभर क�

इ�कठपुतली जैस�ज़िंदगी की

डोरी-डोरी टू�जात�है

मुझ�उ�मो�पर

बस इ�तुम्हार�ह�ज़रूर�है

मग�य�ज़िंदगी की ॰खूबसूर�इ�हक़ीक़�है

क�मेरी राह मे�जब ऐसा को�मो�आय�है

त�हर उ�मो�पर मैंन�/span>

तुम्हे�हमराह पाया है।

 

***

 

ग़ज़�/span>

दस्तबरदार अग�आ�ग़ज़�स�ह�जाए�/span>

हर सितम भूलक�हम आपक�अ�स�ह�जाए�/span>

 

चौदहवी�शब है त�खिड़की क�गिर�द�पर्द�/span>

कौ�जान�क�व�नारा�ह�शब स�ह�जाए�/span>

 

ए�ख़ुश्ब�की तरह फैलत�है�महिफ़ल मे�

ऐस�अल्फ़ा�अद�ज�तिर�लब स�ह�जाए�/span>

 

न को�इश्�है बाक़�न को�परचम है

लो�दीवान�भला किसक�सबब स�ह�जाए�/span>

 

बाँध ल�हाथ क�फैले�न किसी क�आग�/span>

स�ल�य�लब क�कही�वा न तलब स�ह�जाएं�/span>

 

बात त�छे�मिर�दिल, को�क़िस्सा त�सुना

क्य�अज�उ�क�भ�जज़्बा�अज�स�ह�जाए�/span>

 

***

 

ग़ज़�/span>

मै�क�स�कितन�हू�तन्हा तुझ�पता भ�नही�/span>

तिरा त�को�ख़ुद�है मिरा ख़ुद�भ�नही�

 

कभी य�लगत�है अ�ख़त्�ह�गय�सब कु�/span>

कभी य�लगत�है अ�त�त�कु�हु�भ�नही�/span>

 

कभी त�बात की उसन�/span>, कभी रहा ख़ामो�/span>

कभी त�हँसक�मिला औ�कभी मिला भ�नही�/span>

 

कभी ज�तल्�कलामी थ�व�भ�ख़त्�हुई

कभी गिल�था हमे�उनस�अ�गिल�भ�नही�/span>

 

व�चीख़ उभरी, बड़�दे�गूँजी, डू�ग�/span>

हर ए�सुनता था लेकि�को�हिला भ�नही�/span>

 

***

कच्ची बस्त�/span>

गलिया�/span>

औ�गलियो�मे�गलिया�/span>

छोट�घर

नीच�दरवा॰ज�/span>

टाट क�पर्द�/span>

मैल�बदरंगी दीवारे�/span>

दीवारो�स�सर टकराती

को�गाली

गलियो�क�सीन�पर बहत�

गंदी नाल�/span>

गलियो�क�माथ�पर बहता

आवाज़ो�क�गंद�नाला

 

आवाज़ो�की भी�बहुत है

इंसानो�की भी�बहुत है

कड़व�औ�कसील�चेहर�/span>

बदहाल�क�ज़ह�स�है�ज़हरील�चेहर�/span>

बीमारी स�पील�चेहर�/span>

मरत�चेहर�/span>

हार�चेहर�/span>

बेब�औ�बेचार�चेहर�/span>

सार�चेहर�

 

ए�पहाड़�कचर�की

औ�उ�पर फिरत�/span>

आवार�कुत्तो�स�बच्च�/span>

अपन�बचपन ढ़ूँ�रह�है�/span>

 

दिन ढलता है

इ�बस्त�मे�रहनेवाल�/span>

औरो�की जन्नत क�अपनी मेहन�देक�/span>

अपन�जहन्नम की जानिब

अ�थक�हुए

झुंझला�हुए-स�/span>

लौट रह�है�

ए�गली मे�/span>

॰जं�लग�पीप�रक्ख�है�/span>

कच्ची दार�मह�रह�है

 

आ�सवेर�स�/span>

 à¤¬à¤¸à¥à¤¤à¥? मेà¤?/span>

क़त्ल�॰खू�क�

चा॰कूज़नी क�/span>

को�क़िस्सा नही�हु�है

ख़ै�/span>

अभी त�शाम है

पूरी रात पड़�है

 

यू�लगत�है

सार�बस्त�/span>

जैस�इ�दुखत�फोड़�है

यू�लगत�है

सार�बस्त�/span>

जैस�है इ�जलता कढ़ा�/span>

यू�लगत�है

जैस�ख़ुद�नुक्क�पर बैठा

टूट�फूट�इंसा�/span>

औन�पौन�दामो�/span>

बे�रहा है।

 

***

ए�शायर दोस्�स�/span>

घर मे�बैठ�हुए क्य�लिखत�ह�/span>

बाहर निकल�/span>

देख�क्य�हाल है दुनिया क�/span>

य�क्य�आल�है

सूनी आँखे�है�/span>

सभ�ख़ुशियो�स�ख़ाली जैस�/span>

आ�इ�आँखो�मे�ख़ुशियो�की चम�हम लि�दे�/span>

य�ज�माथ�है�/span>

 à¤‰à¤¦à¤¾à¤¸à¥€ की लकीरोà¤?कà¥?तलà¥?/span>

आ�इ�माथो�प�िक़स्मत की दम�हम लि�दे�/span>

चेहरो�स�गहरी य�मायूसी मिटाक�/span>

आ�/span>

इनप�उम्मीद की इ�उजली किर�हम लि�दे�/span>

दू�त�ज�हमे�वीरान�नज़�आत�है�/span>

आ�वीरानो�पर अ�ए�चमन हम लि�दे�/span>

ल॰प॰Ìज-दर-लफ्� समुंद�सा बह�/span>

मौज-ब-मौज

बह्र�नग़मात मे�/span>

हर कोह�सितम हल ह�जाए

 à¤¦à¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ दुनिया न रहà¥?एà¤?ग़ज़à¤?हà¥?जाए।

 

***

 

ग़ज़�/span>

दिल क�हर दर्द ख�गय�जैस�/span>

मै�त�पत्थर क�ह�गय�जैस�/span>

 

दा� बाक़�नही�क�न॰क्�कहू�/span>

को�दीवा�ध�गय�जैस�/span>

 

जागत�ज़ह�ग़म की धू�मे�था

छाँ�पात�ह�स�गय�जैस�/span>

 

देखनेवाल�था क�उ�क�तपा�/span>

फिर स�व�॰गै�ह�गय�जैस�/span>

 

कु�बिछड़न�क�भ�तरी॰व�है�/span>

ख़ै�/span>, जान�द�ज�गय�जैस�/span>

 

***

 

ग़ज़�/span>

अभी ज़मीर मे�थोड़ी-स�जान बाक़�है

अभी हमारा को�इम्तेहा�बाक़�है

 

हमार�घर क�त�उजड़�हुए ज़मान�हु�/span>

मग�सुना है अभी व�मका�बाक़�है

 

हमार�उनस�ज�थ�गु॰फ्तग�/span>, व�ख़त्�हुई

मग�सुकू�सा कु�दरमियान बाक़�है

 

हमार�ज़ह�की बस्त�मे�आ�ऐस�लगी

क�ज�था ख़ा�हु�इ�दुका�बाक़�है

 

व�ज़॰ख्�भर गय�अर्स�हु�मग�अबत�

ज़र�सा दर्द ज़र�सा निशान बाक़�है

 

ज़र�स�बात ज�फैल�त�दास्तान बन�

व�बात ख़त्�हुई दास्तान बाक़�है

 

अ�आय�ती�चलान�क�फ़न त�क्य�आय�/span>

हमार�हाथ मे�ख़ाली कमा�बाक़�है

 

***

 

ग़ज़�/span>

य�मुझस�पूछत�है�चाराग�क्यो�

क�त�ज़िंद�त�है अ�त�/span>, मग�क्यो�/span>

 

ज�रस्ता छोड़क�मै�जा रहा हू�/span>

उसी रस्त�प�जात�है नज़�क्यो�/span>

 

थक�स�चू�पास आय�था इसक�/span>

गिर�सोत�मे�मुझपर य�शजर क्यो�

 

सुनाएंग�कभी ॰फुर्सत मे�तुम क�/span>

क�हम बरसो�रह�है�दरबदर क्यो�/span>

 

यहाँ भ�सब है�बेगान�ह�मुझस�/span>

कहू�मै�क्य�क�याद आय�है घर क्यो�/span>

 

मै�ख़ु�रहता अग�समæझा न होत�/span>

य�दुनिया है त�मै�हू�दीदाव�क्यो�/span>

 

***

 

ग़ज़�/span>

ज़िंदगी की आँधी मे�ज़ह�क�शजर तन्हा

तुमस�कु�सहारा था, आ�हू�मग�तन्हा

 

ज़॰ख्�ख़ुर्द�लम्हो�क�मसलेह�संभाल�है

अनगिन�मरीज़ो�मे�ए�चाराग�तन्हा

 

बूँ�जब थ�बादल मे�ज़िंदगी थ�हलचल मे�/span>

॰कै�अ�सदफ़ मे�है बनक�है गुह�तन्हा

 

तुम ॰फु॰जू�बातो�क�दिल प�बो�मत लेन�/span>

हम त�ख़ै�क�लेंग�ज़िंदगी बसर तन्हा

 

इ�खिलौन�जोगी स�ख�गय�था बचपन मे�/span>

ढूँढत�फिरा उसक�व�नग�नग�तन्हा

 

झुटपुट�क�आल�है जान�कौ�आद�है

इ�लहद प�रोत�है मुँह क�ढाँपक�तन्हा

 

***

 

ग़ज़�/span>

व�ज़मान�गुज़�गय�क�क�/span>

था ज�दीवान�मर गय�क�क�/span>

 

ढ़ूँढत�था ज�इ�नई दुनिया

लौटक�अपन�घर गय�क�क�/span>

 

व�ज�लाया था हमक�दरिया त�/span>

पार अकेल�उत�गय�क�क�/span>

 

उसक�ज�हाल है वह�जान�/span>

अपन�त�ज़॰ख्�भर गय�क�क�/span>

 

ख्वा�दर-ख्वा�था ज�शीराज़�/span>

अ�कहा�है, बिख�गय�क�क�/span>

 

***

 

ग़ज़�/span>

य�दुनिया तुमक�रास आ�त�कहन�/span>

न सर पत्थर स�टकरा�त�कहन�/span>

 

य�गु�काग़�है�/span>, य�॰जेव�है�पीत�/span>

समझ मे�जब य��जाए त�कहन�/span>

 

बहुत ख़ु�ह�क�उसन�कु�कह�है

न कहक�व�मुक�जाए त�कहन�/span>

 

बहल जाओग�तुम ग़म सुनक�मेर�/span>

कभी दिल ग़म स�घबराए त�कहन�/span>

 

धुआ�ज�कु�घरो�स�उ�रहा है

न पूर�शहर पर छा�त�कहन�/span>

 

***

बरवक़्त ए�औ�ख़या�/span>

ख़या�आत�है

जैस�बच्चो�की आँ�बादल मे�/span>

शे�औ�हाथ�देखती है

बहुत-स�लोगो�न�/span>

वक़्त मे�भ�/span>

शऊर बीना�औ�समाअ�/span>

क�वस्फ़ देख�/span>

बहुत-स�लोगो�की जुस्तुज�क�सफ़र क�अंजा�/span>

इ�अक़ीद�nbsp; की छाँ�मे�है

क�वक़्त कहत�है�जिसक�/span>

दर अस्�व�ख़ुद�है

 

मग�है जिसक�तलाश सच की

भट�रहा है

 

य�इ�सवाल

उसक�ज़हन�दिल मे�/span>

खट�रहा है

य�वक़्त क्य�है?

 

***

अजीब आदमी था व�/span>

(कैफ़ी साहब)

अजीब आदमी था व�/span>

मुहब्बतो�क�गीत था,

ब॰गावतो�क�रा�था

कभी व�सिर्फ़ फू�था

कभी व�सिर्फ़ आ�था

अजीब आदमी था व�/span>

 

व�मुफ़लिसो�nbsp; स�कहत�था

क�दिन बदल भ�सकत�है�/span>

व�जाबिरो�स�कहत�था

तुम्हार�सर प�सोन�क�ज�ताज है�/span>

कभी पिघल भ�सकत�है�/span>

 

व�बंदिशो�स�कहत�था

मै�तुमक�तो�सकत�हू�/span>

सहूलतो�स�कहत�था

मै�तुमक�छो�सकत�हू�/span>

हवाओ�स�व�कहत�था

मै�तुमक�मो�सकत�हू�/span>

 

व�ख्वा�स�य�कहत�था

क�तुझक�सच करूँग�मै�/span>

व�आरज़�स�कहत�था

मै�तेर�हमसफ़र हू�/span>

तेर�साथ ह�चलूँग�मै�/span>

त�चाह�जितन�दू�भ�बना ल�अपनी मंज़ले�/span>

कभी नही�थकूँग�मै�/span>

 

व�ज़िंदगी स�कहत�था

क�तुझक�मै�सजाऊँग�/span>

त�मुझस�चाँद माँ�ल�

मै�चाँद लेक�आऊँग�/span>

 

व�आदमी स�कहत�था

क�आदमी स�प्यार क�/span>

उज�रह�है य�ज़मी�/span>

कु�इसक�अ�सिंघा�क�/span>

 

अजीब आदमी था व�/span>

 

व�ज़िंदगी क�सार�ग़म

तमाम दु�/span>

हर इ�सितम स�कहत�था

मै�तुमस�जी�जाऊँग�/span>

क�तुमक�त�मिटा ह�देग�

ए�रो�आदमी

भुला ह�देग�य�जहाँ

मिर�अल�है दास्ताँ

 

व�आँखे�जिनमे�ख्वा�है�/span>

व�दिल है जिनमे�आरज़�/span>

व�बा॰ज�जिनमे�है सक�/span>

व�हों�जिनप�लफ्�है�/span>

रहूँग�उनक�दरमियाँ

क�जब मै�बी�जाऊँग�/span>

 

अजीब आदमी था वो�/span>

 

***

 

ग़ज़�/span>

आ�मैंन�अपन�फिर सौदा किय�/span>

औ�फिर मै�दू�स�देख�किय�/span>

 

ज़िंदगी भर मेर�का�आ�उसू�/span>

ए�इ�करक�उन्हे�बेच�किय�/span>

 

बँध ग�थ�दिल मे�कु�उम्मीद-स�/span>

ख़ै�/span>, तुमन�ज�किय�अच्छ�किय�/span>

 

कु�कमी अपनी वफ़ाओ�मे�भ�थ�/span>

तुमस�क्य�कहत�क�तुमन�क्य�किय�/span>

 

क्य�बताऊँ कौ�था जिसन�मुझ�/span>

इ�भर�दुनिया मे�है तन्हा किय�/span>

 

***

मेल�/span>

बाप की उँगली थाम�/span>

इ�नन्हा-सा बच्चा

पहल�पहल मेल�मे�गय�त�/span>

अपनी भोली-भाल�/span>

कंचो�जैस�आँखो�स�/span>

इ�दुनिया देखी

य�क्य�है औ�व�क्य�है

सब उसन�पूछ�/span>

बाप न�झुकक�/span>

कितनी सार�चीज़ो�औ�खेलो�क�/span>

उसक�नाम बताया

नट क�/span>

बा॰जीग�क�/span>

जादूग�क�/span>

उसक�का�बताया

फिर व�घर की जानिब लौट�/span>

गो�क�झूल�मे�/span>

बच्च�न�बाप क�कंध�पर सर रक्ख�/span>

बाप न�पूछ�/span>

नीं�आती है

 

वक़्त भ�ए�परिंद�है

उड़त�रहता है

 

गाँ�मे�फिर इ�मेल�आय�/span>

 à¤¬à¥‚ढ़à¥? बाप नà¥?काँपतà¥?हाथोà¤?सà¥?/span>

बेट�की बां�क�थामा

औ�बेट�न�/span>

य�क्य�है औ�व�क्य�है

जितना भ�बन पाया

समझाया

बाप न�बेट�क�कंध�पर सर रक्ख�/span>

बेट�न�पूछ�/span>

नीं�आती है

बाप न�मुड़क�/span>

याद की पगडंडी पर चलत�/span>

बीत�हुए

सब अच्छ�बुर�/span>

औ�कड़व�मीठ�/span>

लम्हो�क�पैरो�स�उड़ती

धू�क�देख�/span>

फिर

अपन�बेट�क�देख�/span>

होंठो�पर

इ�हलकी-स�मुस्का�आ�/span>

हौल�स�बोल�/span>

हाँ!

मुझक�अ�नीं�आती है।

 

***

मोनता�/span>

नीं�क�बादलो�क�पीछ�है

मुस्कुरात�हु�को�चेहर�/span>

चेहर�प�बिखरी ए�रेशमी लट

सरसराता हु�को�आँच�/span>

औ�द�आँखे�हैराँ-हैराँ-स�/span>

 

इ�मुलाक़ात

इ�हसी�लम्हा

झी�क�ठहरा-ठहरा-सा पान�/span>

पे�पर चहचहात�इ�चिड़िया

घास पर खिलत�नन्ह�नन्ह�फू�/span>

॰खूबसूर�लबो�प�नर्म-स�बात

 

दोपह�ए�पीली-पीली-स�/span>

बर्फ़-स�ठंड�ए�लहज�मे�/span>

टूट�आईन�/span>

उड़त�कु�क�/span>æग�/span>

मुन्हदिम पुल

अधूरी ए�सड़�/span>

किरचो�किरचो�बिखरत�इ�मंज़�/span>

पलको�पर झिलमिलाता ए�आँस�/span>

गहर�सन्नाटा शो�करत�हु�/span>

नीं�क�बादलो�क�पीछ�है।

 

***

 

ग़ज़�/span>

किसलि�कीज�बज़्�आरा�/span>

पुरसुकू�ह�ग�है तन्हाई

 

फिर ख़मोशी न�सा�छेड़�है

फिर ख़याला�न�ल�अंगड़ा�/span>

 

यू�सुकू�आशन�हुए लम्ह�/span>

बूँ�मे�जैस�आ�गहरा�/span>

 

इ�स�इ�वाक़�हु�लेकि�/span>

न ग�तेर�ग़म की यकता�/span>

 

को�शिकव�न ग़म, न को�याद

बैठ�बैठ�बस आँ�भर आ�/span>

 

ढलकी शानो�स�हर य॰की�की क़बा

ज़िंदगी ल�रह�है अंगड़ा�/span>

 

***

 

ग़ज़�/span>

न ख़ुशी द�त�कु�दिलासा द�/span>

दोस्�/span>, जैस�ह�मुझक�बहला द�/span>

 

आगही स�मिल�है तन्हाई

�मिर�जान मुझक�धोक�द�/span>

 

अ�त�तक्मील की भ�शर्त नही�/span>

ज़िंदगी अ�त�इ�तमन्ना द�/span>

 

ऐ सफ़र इतन�राएगा�त�न जा

न ह�मंज़ि�कही�त�पहुँचा द�/span>

 

तर्�करन�है ग�तअल्लु�त�/span>

ख़ु�न जा त�किसी स�कहल�द�/span>

 

***

पन्द्रह अगस्�/span>

(यà¥? नज़्à¤?/span>  à¤…गस्à¤?nbsp; कà¥?हिंदुस्तानी पार्लियामेंà¤?मेà¤?उसी जगà¤?सुनाई गà¤?थà¥?जहाँ सà¥?nbsp; अगस्à¤?nbsp; मेà¤?पंडिà¤?जवाहर लाल नेहरà¥?नà¥?आज़ादी कà¤?एलान कियà¤?था)

 

यह�जग�थ�यह�दिन था औ�यह�लम्हात

सरो�प�छा�थ�सदियो�स�इ�ज�काली रात

इसी जग�इसी दिन त�मिल�थ�उसक�मात

इसी जग�इसी दिन त�हु�था य�एलान

अँधेर�हार ग�ज़िंदाबा�हिंदुस्ता�/span>

यही�त�हमन�कह�था य�क�दिखान�है

ज�ज़॰ख्�तन प�है भारत क�उसक�भरना है

ज�दाग़ माथ�प�भारत क�है मिटाना है

यही�त�खा�थ�हम सबन�य�क़सम उ�दिन

यही�स�निकल�थ�अपन�सफ़र प�हम उ�दिन

यही�था गूँ�उठ�वंद�मातरम् उ�दिन

 

है जुरअतो�क�सफ़र वक़्त की है राहगुज़�/span>

नज़�क�सामन�है साठ मी�क�पत्थर

को�ज�पूछ�किय�क्य�है कु�किय�है अग�/span>

त�उसस�क�द�क�व�आ�दे�ल�आक�/span>

लगाय�हमन�था जम्हूरिय�क�ज�पौधा

व�आ�ए�घनेर�सा ऊँचा बरग�है

औ�उसक�साय�मे�क्य�बदला, कितन�बदला है

क�इन्तेह�है को�इसकी क�को�हद है

 

चम�दिखात�है�ज़र्र�अ�आस्मानो�क�/span>

ज़बा�मिल ग�है सार�बेज़बानो�क�/span>

ज�ज़ुल्�सहत�थ�व�अ�हिसाब माँगत�है�/span>

सवाल करत�है�औ�फिर जवाब मांगत�है�/span>

य�क�की बात है सदियो�पुरान�बात नही�

क�क�तल�था यहाँ कु�भ�अपन�हाथ नही�/span>

विदेशी राज न�सब कु�निचो�डाला था

हमार�दे�क�हर करघ�तो�डाला था

ज�मुल्�सू�की ख़ाति�था औरो�क�मोहता�/span>

हज़ारो�चीज़े�व�दुनिया क�द�रहा है आ�/span>

नया ज़मान�लिय�इ�उमं�आय�है

करोड़ो�लोगो�क�चेहर�प�रं�आय�है

य�सब किसी क�कर�स�/span>, न है इनाय�स�/span>

यहाँ त�आय�है भारत ख़ु�अपनी मेहन�स�/span>

 

ज�कामयाबी है उसकी ख़ुशी त�पूरी है

मग�य�याद भ�रखन�बहुत ज़रूरी है

क�दास्तान हमार�अभी अधूरी है

बहुत हु�है मग�फिर भ�य�कमी त�है

बहुत-स�होंठो�प�मुस्का��ग�लेकि�/span>

बहुत-स�आँखे�है�जिनमे�अभी नम�त�है

 

यह�जग�थ�यह�दिन था औ�यह�लम्हात

यही�त�देख�था इ�ख्वा�सोची थ�इ�बात

मुसाफ़रो�क�दिलो�मे�ख़या�आत�है

हर इ�ज़मीर क�आग�सवाल आत�है

व�बात याद है अ�त�हमे�क�भू�ग�/span>

व�ख्वा�अ�भ�सलामत है�या ॰फु॰जू�ग�/span>

चल�थ�दिल मे�लिए ज�इराद�पूर�हुए

ज�हमन�ख़ु�स�कि�थ�व�वाद�पूर�हुए

य�कौ�है क�ज�यादो�मे�च॰र्ख�कातत�है

य�कौ�है ज�हमे�आ�भ�बताता है

है वादा ख़ु�स�निभाना हमे�अग�अपन�/span>

त�कारवा�नही�रू�पाय�भूलक�अपन�/span>

है थोड़ी दू�अभी सपनो�क�नग�अपन�/span>

मुसाफ़र�अभी बाक़�है कु�सफ़र अपन�।

 

***

 

ग़ज़�/span>

मै�ख़ु�भ�क�य�कहत�हू�को�सबब नही�/span>

त�सच है मुझक�छो�भ�द�त�अज�नही�/span>

 

वापस ज�चाह�जाना त�जा सकत�ह�मग�/span>

अ�इतनी दू��ग�हम, देख�अ�नही�/span>

 

ज़�क�/span>, ज़रूरतो�क�/span>, ज़मान�क�/span>, दोस्त�/span>

करत�त�हम भ�है�मग�इतन�अद�नही�/span>

 

मेर�ख़ुलू�है त�हमेश�क�वास्त�/span>

तेर�कर�नही�है क�अ�है औ�अ�नही�/span>

 

आ�व�रो॰ज�शब क�ज�चाह�थ�रो॰ज�शब

त�मेर�रो॰ज�शब भ�मिर�रो॰ज�शब नही�/span>

 

दुनिया स�क्य�शिकायते�/span>,लोगो� स�क्य�गिल�/span>

हमक�ह�ज़िंदगी स�निभान�क�ढब नही�/span>

 

***

हमसाय�क�नाम

कु�तुमन�कह�

कु�मैंन�कह�/span>

औ�बढ़त�बढ़त�बात बढ़�/span>

दिल ऊब गय�/span>

दिन डू�गय�/span>

औ�गहरी-काली रात बढ़�/span>

 

तुम अपन�घर

मै�अपन�घर

सार�दरवा॰ज�बं�कि�/span>

बैठ�है�कड़व�घूं�पिए

ओढ़�है�॰गुस्स�की चादर

 

कु�तुम सोच�/span>

कु�मै�सोचू�/span>

क्यो�ऊँच�है�य�दीवारे�/span>

क�त�हम इ�पर सर मारे�/span>

क�त�य�अँधेर�रहन�है�/span>

कीना क�य�घेर�रहन�है�/span>

चल�अपन�दरवा॰ज�खोले�/span>

औ�घर स�बाहर आए�हम

दिल ठहर�जहाँ है�बरसो�स�/span>

व�इ�नुक्क�है नफ़रत क�/span>

क�त�इ�नुक्क�पर ठहरे�/span>

अ�उसक�आग�जाए�हम

बस थोड़ी दू�इ�दरिया है

जहाँ ए�उजाल�बहता है

वाँ लहरो�लहरो�है�किरने�/span>

 à¤”à¤? किरनोà¤?किरनोà¤?हैà¤?लहरेà¤?/span>

उ�किरना�मे�/span>

उ�लहरो�मे�/span>

हम दिल क�॰खू�नहान�दे�/span>

सीनो�मे�ज�इ�पत्थर है

उ�पत्थर क�घुल जान�दे�/span>

दिल क�इ�कोन�मे�भ�छुपी

ग�थोड़ी-स�भ�नफ़रत है

उ�नफ़रत क�धुल जान�दे�/span>

दोनो�की तरफ़ स�जिस दिन भ�/span>

इ॰ज्हा�नदामत क�होग�/span>

तब जश्न मुहब्बत क�होगा�/span>

 

***

 

ग़ज़�/span>

हमार�दिल मे�अ�तल्॰खी नही�है

मग�व�बात पहल�स�नही�है

 

मुझ�मायू�भ�करती नही�है

यह�आद�तिर�अच्छी नही�है

 

बहुत-स�फ़ायद�है�मसलेह�मे�/span>

मग�दिल की त�य�म॰र्जा नही�/span>r है

 

हर इ�की दास्ताँ सुनत�है�जैस�/span>

कभी हमन�मुहब्बत की नही�है

 

है इ�दरवाज़�बिन दीवा�दुनिया

मफ़र ग़म स�यहाँ को�नही�है

 

***

 

ग़ज़�/span>

याद उस�भ�ए�अधूर�अफ़सान�त�होग�/span>

क�रस्त�में�उसन�हमक�पहचाना त�होग�/span>

 

डर हमक�भ�लगत�है रस्त�क�सन्नाट�स�/span>

लेकि�ए�सफ़र पर ऐ दिल, अ�जाना त�होग�/span>

 

कु�बातो�क�मतलब है�औ�कु�मतलब की बाते�/span>

ज�य�॰फ़॰र्�समझ लेग�व�दीवान�त�होग�/span>

 

दिल की बाते�नही�है�त�दिलचस्प ह�कु�बाते�हो�/span>

ज़िंद�रहना है त�दिल क�बहलाना त�होग�/span>

 

जी�क�भ�व�शर्मिंद�है, हार क�भ�हम ना॰जाँ

क�स�क�व�दिल ह�दिल मे�य�माना त�होग�/span>

 

***

 

ग़ज़�/span>

दर्द कु�दिन त�मेह्मा�ठहर�/span>

हम बिज़�है�क�मेज़बा�ठहर�/span>

 

सिर्फ़ तन्हाई सिर्फ़ वीरानी

य�नज़�जब उठ�जहाँ ठहर�/span>

 

कौ�स�ज़॰ख्�पर पड़ाव किय�/span>

दर्द क�क़ाफ़ल�कहा�ठहर�/span>

 

कैस�दिल मे�ख़ुशी बसा लू�मै�/span>

कैस�मुटठ�मे�य�धुआ�ठहर�/span>

 

थ�कही�मसलेह�कही�जुअर्�/span>

हम कही�इनक�दरमियाँ ठहर�/span>

 

***

पे�स�लिपट�बे�/span>

ए�पुरान�/span>

औ�घनेर�पे�की इ�डाल�स�लिपट�/span>

बे�मे�/span>

सार�पे�की रंग�/span>

पे�की ख़ुश्ब�/span>

समा ग�थ�/span>

बे�भ�पे�क�इ�हिस्सा थ�/span>

पे�क�बार�मे�/span>

यू�त�सौ अ॰फ्सान�थ�/span>

बे�क�को�ज़िंक्�नही�था

व�ख़ामो�सा इ�क़िस्सा थ�/span>

 

पे�प�रंगो�क�मौसम था

बे�प�जैस�/span>

हल्की-स�मुस्का�क�/span>

नन्हे�फू�खिल�थ�/span>

लेकि�/span>

फिर य�मौसम बदला

औ�बड़�ज़हरील�हवाए�/span>

पे�गिरान�/span>

चारो�दिशाओ�स�जब लपकी�/span>

यू�लगत�था

पे�हवा मे�/span>

पत्ता-पत्ता बिख�रहा है

यू�लगत�था

सार�शाखे�टू�रह�है�/span>

यू�लगत�था

सार�जड़े�अ�उख�रह�है�/span>

पल द�पल मे�/span>

पे�ज़मी�पर

मुँह क�बल गिरनेवाल�है

पर ज�हु�/span>

व�क़िस्सा भ�सुनन�वाला है

 

पे�ज�काँप�/span>

बे�क�तन-मन मे�जैस�

इ�बिजल�दौड़�/span>

रेश�जैस�बे�क�रेश�रेश�/span>

जैस�लोह�क�इ�तार बना

औ�बे�न�/span>

सार�टूटी शा॰खो�क�/span>

यू�बाँधा

पे�क�सार�घायल तन क�/span>

यू�लिपटाया

पे�की हर ज़॰ख्मी डाल�क�/span>

 à¤•à¥à¤? यूà¤?थामा

जितन�थी�ज़हरील�हवाए�/span>

पे�स�सर टकर�टकर�क�/span>

हार ग�है�/span>

हाँप रह�है�/span>

होक�परीशा�/span>

हक्क�बक्क�दे�रह�है�/span>

 

वक़्त क�भ�है�खे�निराल�/span>

बे�अपनी बाँहो�मे�अ�है पे�संभाल�/span>

धीर�धीर�/span>

घायल शा॰खो�पर

पत्त�फिर निक�रह�है�/span>

धीर�धीर�/span>

नई जड़े�फूटी है�/span>

औ�धरत�मे�गहरी उत�रह�है�/span>

बे�प�जैस�/span>

ए�नई मुस्का�क�नन्ह�फू�खिल�हैं�/span>

 

***

 

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